Sunday, 14 January 2018

Only rehotic No substance

भारत मे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं मे चुनाव होते हैं और हर पांच साल में वोट होते है, और उसमें लगभग 60% जनता ही वोट देती है, और वो भी माञ नेताओं के भाषणों में उनके द्वारा किये हुए वादों या किसी एक विशेष भावनात्मक ईशू पर नेता की एक काल्पनिक छवी बना,
यह एक सर्वविदित क्रूर सत्य रहा है भारत के लोकतंञ का, और
मतदाताओं को कभी भी इन सरकारी जटिल आंकडो और उनके राजनैतिक दुरगामी प्रभाव जैसे नोटबंदी, GST वाले निर्णयों से कही अधिक रुची इस बात पर होती है कि हमे क्या मिला ? क्या जिसका वादा हमे नेता या पार्टी ने अपने भाषण मे किया था चुनावों के पहले, वो पुरा हुआ की नही..।
तो उसी संदर्भ मे मैं आपको स्मरण कराना चाहता हु वो भाषण जो आज भी मतदाताओं को याद है..जो मोदीजी ने कभी सभाओं में तो कभी टीवी इंटरव्यू के द्वारा तो कभी सोसलमिडिया द्वारा मतदाताओं तक पहुचाये थे 👇

1" आपने कांग्रेस को 60 वर्ष दिये, मुझे 5 वर्ष दिजिये.....।"
2" Pink Industries को बंद किया जायेगा.."
3"बंगलादेश से हो रही घुसपैठ पर पुर्णततया रोक लगा बंगलादेशियों को वापस भेजा जायेगा.."
4, एक वर्ष में तमाम संसद के राजनेताओँ के भ्रष्टाचार के मामलों को उच्चतम न्यायालय के माध्यम से निपटाया जायेगा..।
(5, कांग्रेशियों ने लोगों को सब्सिडी दे निकम्मा बना दिया है हम इतनी ताकत देंगे की वो खुद चार के पेट भरेगें इतने रोजगार के साधन उप्लब्ध करायेगें)
(6, विदेशों में जमा कालाधन वापस लाएंगे और भ्रष्टाचारी उद्दोगपति और राजनेताओं ने जो घरेलू कालाधन जमा किया है वो बाहर करेगें जो इतना है की एक एक के खाते में 15 लाख हो जायें)
(7, अयोध्या की जनसभा में भव्यराममंदिर और प्रभूराम की तस्वीरों के सामने खडे होकर भाषण दे अपनी अपरोक्ष प्रतिबद्धता का संकेत)

और आज जिस तरह जमीनी हकीकत, सिस्टम का दोष और 70 साल के बने गड्ढों के आंकडे पेश कर,क्या आप चुनाव के पहले के आपके स्वंय के आकलन और उन वायदों को पुरा करने के लिये अतिरिक्त समय मांग कर,क्या आप खुद ही आप खुद के पुर्व के आकलनों को गलत शाबित करते प्रतीत नही हो रहे हैं सरेआम"?
या मतदाताओं को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि, पता तो था, परन्तु हम वोट मे जीतने के लिये माञ चुनावी भाषण दे रहे थे तब "???

और सबसे बडी बात आज भारत के  60% हिन्दु मतदाता को ना इन पाश्चात्य प्रभावित सोसलमिडिया के बुद्धिजिवियो द्वारा प्रसारित Right-wing, Left-wing की अवधारणाओं से मतलब है ना इ्स क्षद्म सैक्युलरिज्म से ही,

वो तो माञ चुनाव मे नेताओं द्वारा दिये भाषणों और वादों पर उन्हें वोट देती है.. और

जब वह आपके साथ जुडते है तो ये समस्त राजनैतिक नेताओं और उनके पार्टि के कार्यकर्ताओं की जिम्मेवारी होती है कि उन्हें अपने पास बनाये रखने के लिये उनकी शंकाओ का समाधान देकर निवारण करे ताकि उनमे आपके प्रति विश्वास बना रहे..
परन्तु अफसोस इसके उलट जब जब कोई मतदाता किसी नेता और कार्यकर्ताओं से प्रश्न पुछते हैं तो उन्ही हिन्दुवादी वोटरों को कभी आपीया, कभी कांग्रेशी और ना जाने क्या क्या कह अपमानित करने की प्रथा चल निकली है आजकल...

सारे आदर्श धरे रह जाते हैं जब किसी व्यक्ति के आत्मसम्मान को चोट पहुचती है तो, या उसकी रोजीरोटी छीनी जाती है या उनके रोजगार के साधनों पर सीधा प्रहार होता है तब,..

पार्टि कार्यकर्ता का कार्य साथ मे आये समर्थक रुपी साथीयों को जोडे रखना होता है और विपक्ष द्वारा किये गये भ्रामक प्रचार से भ्रमित हुवे आमलोगों को सही मार्ग मे लाना होता है नाकी जो अपने हैं उन्हें ही नित्य अपमानित कर खुद से ही दुर कर देना..।

और जब तक हम हिन्दुओ को ऐक विशेष पार्टी का सदस्य होने पर ही सच्चा हिन्दू मनवाने की जिद्द बनी रहेगी इन पार्टियों की,ना ही यह निती कभी किसी पार्टि को सख्त कर पायेगी ना हिन्दुओ को ही..।।।।

There is popular saying in corporate world " If you can't convince them, Confuse them..""

I hope we are not doing that...By daily dose of rehotic by raising new issues which had nothing to do with past promise made ..
😀😀

ईतिहास गवाह है अक्सर वही धार्मिक आंदोलन सफल हुवे है जिनको राजसत्ता का समर्थन मिला है.. और हिन्दू समाज को कांग्रेसी शासन मे तो कभी मिलने की उम्मीद थी ही नही और अभी जो राजसत्ता है उसकी भी priorities हिन्दूओ के मुद्दे से कही अधीक खुद की छवी सैक्यूलरों को रिझाने और better than whorst दिखा बेहतर विकल्प दिखाने की अधिक दिख रही है..

ना वादे पुरे करने में ध्यान है ना ईरादे ही दिख रहे हैं फिलहाल तो,
बस दिख रहे हैं तो तमाशे..और क्षद्म महिमामंडन और व्यक्तापुजा माञ....

यह तो कांग्रेश की सत्ता वापसी की जल्दबाजी मे किये जा रहे रोज कुछ ना कुछ मुर्खतापुर्ण कदम हैं जिनका लाभ अपरोक्ष रुप से मिल रहा है भाजपा को वरना जो लिछादरी गुजरात में होते होते बची विकास के नाम पर वह 2019 मे भी होते देर नही लगेगी..

अभी भी सम्भल जाऐं.. मूल पर लौट आयें और जो वादे किये हैं उपरोक्त उन्हें पुरा करें यथाशिघ्र.. 🙏

छोडो ये विकास..सबका साथ सबका विकास का फितूर,
लौट आओ उसी बात पर जिसपर विश्वास कर वोट.दिया था हिंदुओं ने एकजूट हो 2014 में..

We want our Gujarat Model back .. that is not Vikas at all mind it , that was Godhra 🙏

#HarshButTrue

वंदेमातरम् ।।🙏

।।राम।।😊💐🙏

Thursday, 6 October 2016

बामपंथ या लम्पट भोगतंञ *??

बामपंथ या लम्पट भोगतंञ"??

मार्क्स और लेनीन आज जिंदा होते तो इन भारतिय कौम्युनिस्टों को देख अपना मूंह नोच लेते,स्वदेश केलिये सर्वस्व न्योछोवर करने और मरने की शिक्षा दी थी लेनीन ने कभी,
स्वदेश के दुश्मन जो अपने ही देश के सैनिकों के उपर कायरपुर्ण हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दे, उनके सुर मे सुर मिला,उन्ही की भाषा मे बयान दे स्वदेश के साथ गद्दारी करने को नहीं कहा था कभी...
मार्क्स ने धर्म को अफीम कहा था,.ऐक धर्म विशेष के मौलवी बन खुद को धर्म का ठेकेदार बनने को मार्क्सवाद का दर्शन कह प्रचारित करने को तो कतई नही कहा था कभी..
मार्क्सवाद, लेनीनवाद कभी सर्वहारा का मतवाद हुवा करता था..आज सीर्फ मुस्लिम तुष्टीकरण का जरिया ऐंव बुर्जूवा भोगी लम्पट समुदाय का ऐक देशविरोधी महाघातक ऐक महागठबंधन बन गया है जिसका मार्क्सवाद या लेनीनवाद के मान्य स्थापित दर्शन से कोई लेना देना नही है और नाही दुर दुर तक कोई संबध ही और ये जितने आजकल खुद को बामपंथी कह कर प्रचारित करते नजर आ रहे हैं सोसल मिडिया पर या टिवी स्टुडियो मे, या आप जिन्हें बामपंथी समझे बैठे हैं वो सभी या तो मुस्लिमपरस्त लोग है या खाओ,पीयो ऐश करो समुदाय के भोगी लम्पट लोग हैं.. जिनका सीर्फ और सीर्फ ऐक ही उद्देश्य है..
सिमरन जिले अपनी जिंदगी..
जिंदगी मिलेगी ना दोबारा..
कल किसने देखा है..
भोग और रूचि रस की तृप्ती के लिये
जो भी साधन मिले उसे लेलो,
कुछ भी खालो..
कुछ भी, कहीं भी घुसा लो.. ।।
ना इनका कोई देश है
ना कोई आदर्श ही..
मानवता और भाईचारा तो बस इनका 1बहाना है, मकसद इनका सीर्फ
मस्त हो 1जिंदगी बिताना है..

सावधान ऐसे लोगों से मेरे भारतवासियों..

ये ही हैं देश और मानवता के आज के सबसे बडे दुश्मन...

इनके लिये भारत, मातृभूमी नही..
भोग भूमी है माञ....

तुम नही, कोई और सही.. और नही..
कोई और सही..

चल देंगे अपना कालाधान बटोर किसी भी दुसरे मुल्क मे जिस दिन अवसर मिला इन्हें, वीजय मालया और ललीत मोदी की तरह.. पर
हमारे लिये भारत ऐक भौगौलिक जमीन का टुकडा नही है माञ,भाई मेरे,
हमारे पुर्वजों की धरोहर है...
माँ है ये हमारी..
इसे बचा लो मेरे भाईयों बहनों...
बचा लो इसे...छद्ममानवतावाद का नकाब ओढे इन झुठे मक्कारों से और इनका पर्दाफाश करो अविलम्ब..🙏

*देखो वीर जवानों अपने*
*खून पे ये इल्जाम ना आये*
*माँ ना कहे के,मेरे बेटे*
*वक्त पडा तो काम ना आये..*
*देखो वीर....*🙏�

भारत माता की जय..।। 🙏
वंदेमातरम् ।।🙏
।।राम।।🙏

Twitter ID @RajeshTamret

Sunday, 28 August 2016

लोकतंञ या लघुतंञ °??

बहुत बडी कीमत चुका रहा है हमारा देश और बहुसंख्यक समाज काल से प्रभावित संविधान मे डाली उन कानुन की धाराओं की जब जरुरी था लघुसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करना तत्कालिन परिस्थितियों की वजह से शायद.. परंतु आज भी उसे खींचा जा रहा है आखिर क्यों"?
शायद उसी का ही यह परिणाम है कि मुस्लिम अल्पसंख्यक होते हुवे भी सरे आम सडकों पर उतर हिंदुओं की पुज्या गौमाता और धर्म के सबसे बडे जिवीत प्रतिक चिन्ह के मांस को खा चिढाने की हिम्मत जुटा पाते है, और उन्हें उनके मौलिक अधिकार के नाम पर सरकार द्वारा सुरक्षा भी प्रदान कर दी जाती है..
संभवत: उसी का परिणाम है कि मुलायम जैसे छद्म समाजवादी बेशर्मी से उद्घोष करते है कि हजारों हिंदु क्यों ना मारे जाये 1 मुस्लिम या उनके निर्जीव प्रतिक चिन्ह को नुकसान नही होना चाहिये..
शायद इसी का परिणाम है कि लघुसंख्यक भोगी, नास्तिक, लम्पट, संस्कारहिन भ्रष्ट 1विशेष वर्ग सरे आम देश की सबसे बडी आबादी को लगातार मानसीक रुप से प्रताडीत करता रहता है उनके धर्म के प्रत्येक प्रतिकों, सनातनी परंपराओं, संतो और उनके संस्कारों का नित्य अपमान कर के..।।

कैसे मान लुं कि मेरे देश मे लोकतंञ है जबकि यहां तो लघुतंञ है..चंद मुट्ठी भर लोगों की भावनाओं के समर्थन और सिर्फ उन्हिं के मौलिक अधिकारों को सुरक्षा प्रदान करने में मानो पुरी की पुरी व्यवस्था और सरकारी कयानात लगी है..और देश की आबादी का 80% होते हुवे भी बहुसंख्यक हिंदु समाज जाये..... या अपने इष्ट के शरण मे..पुकारते हुवे कि
कृष्ण तुम कब आओगे...।।
हे राम मने उठाले...।।

#भुल_चुक_माफ

#WakeUpHindus
#WakeUpNation

।।वंदेमातरम्।।🙏
।।राम।।🙏🙏

Twitter ID
@RajeshTamret

Sunday, 14 August 2016

अखंड भारत.. ऐक सपना..ःः।

जब हम कहते हैं अखंड भारत तो इसका अर्थ यह कतई नही है कि वो जो चंद वर्षों पहले कुछ राजनैतिक लोगों ने एक कमरे में बैठ कर अपनी महत्वाकाक्षांपुर्ती करने या विदेशियों के दबाव मे आकर या काल और परिस्थिती के वश कुछ आडी तीरछी रेखाऐं खिंच दी अपने मतवाद को स्थापित कर इतिहास पुरुष बनने के लिये, नाकी इस महान भूमी की महान सनातनी परंपराओं को स्थापित करने,या यहां के बहुसंख्यक भावों को मान देने के लिये..
वरना आज भी गाय की सुरक्षा पर चर्चा की जरुरत क्यों हो रही है.."?
क्यों आज भी गंगा को सफाई करने की बात हो रही है.."?
क्यों गीता को राष्ट्रिय ग्रंथ ना मान एक धर्म का ग्रंथ माना जा रहा हैं"?
क्यों आज भी जन्मभूमी को मातृभूमी मानने वाले देश के संस्कारों मे वन्देमातरम् पर प्रश्न उठाये जा रहे हैं"?
अगर सभी उपरोक्त बातें किसी धर्मविशेष से संबधित है तो..
ऐक विशेष दुसरे धर्म की हरकतों पर मौन क्यों "?
जो राष्ट्रध्वज के गायन पर धर्म के आधार पर आपत्ती करता है"?
 जन्मभूमी को जमीन का एक टुकडा और गाय माता को खाद्य समाग्री मानता है"?
 अपने देश से ज्यादा गैर देश से प्रेम करता या मानवता का आवरण चढा प्रेम बढाने की बात करने की सलाह देता है "? *मानवता तो बस बहाना है मकसद तो इनका अपने धर्म वालों से मेल बढाना है..*
*हमने राष्ट्रप्रथम के नाम पर अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों तक कि तिलांजली दे दी और उन्होनें अपने धर्म के लिये राष्ट्रप्रथम को कब्र..*
 इसलिये बदल डालो इन मुगलों और अंगरेजो का इतिहास.. और जागृत करो भाव अपनी दिव्य सनातनी परंपराओं का आर्यपुञों,
 हमारा अंखड भारत वह है जिसके
पश्चिम मे बुद्ध और माँ हिगलाज विराजमान है
पुर्व मे उन सुदूर पहाडियों पर अ़कित भगवान नारायण की मुर्तियां आज भी अंकित है..
उत्तर मे ओम कैलाश पर्वत पर महादेव मान सरोवर की शोभा बढा रहे है..और
दक्षिण मे अशोक वाटिका मे आज भी माँ जानकी की छवी विराजमान है..
हमारी दिव्य सनातनी धरोहर को जानो.. हम विक्रामादित्य के भारतिय है..
ना कि मुट्ठी भर इतिहासकारों और नेताओ के पाले हुवे पोपट कि जो वो पढाये या रटाये उसे रटते रहें..
*जागो पार्थ,पहचानो अपने आप को,
छिन लो जो खोया है तुमने..
कौरव तब भी थे, कौरव आज भी है.. इंद्रप्रस्थ उनका भी छिन लिया गया था और तुम्हारा भी..
तब भी सत्ताधर्म मे बंधे भिष्म और गुरू द्रोण अंधे ध्रितराष्ट्र का साथ दे रहे थे और आज भी अंधे कानून से बधें ये राजनेता सनातन धर्म से विमूख हुवे है..ना पड मोह मे तू क्या खोयेगा.. सोच कि तू क्या पायेगा..
अंखड भारत, दिव्य भारत.. सनातनी परंपराओं से ओतप्रोत अंखड भारत..।।

#AkhandBharat वतर्मान युवा पीढ़ी खंडित भारत को पुनः अखंडभारत बनाने हेतु संकल्पबद्ध हो:

जय माँ भारती
।।वन्देमातरम्।।
।।हर हर हर महादेव।।
।। जय भवानी ।।
।।राम।।
🙏🙏🙏

Sunday, 8 February 2015

"मन की बात"- After #DelhiElection Exit Poll..

हमारी मातृभूमि का स्वर्णिम वीकास सिर्फ प्रभु राम और कृष्ण की प्रेरणा से उनके धर्मपरायण त्याग और मर्यादापूर्ण जीवन को आदर्श माने तभी संभव है।
रामजी ने सुविधाऔ से वंचित वन और वानर समाज को ही साथ लेकर भोगी त्रीलोक वीजयी पढे लिखे रावण के सम्राज्य का नाश कर रामराज्य की स्थापना की थी।
वासूदेव कृष्ण ने धर्म की पुन:स्थापना साधनों से वंचित परन्तु धर्मपरायण पांडवों को ही माध्यम बना कर की थी नाकी तत्कालीन भोगी लोभी उच्च वर्ग को।
आज जो वीकास का मोडल प्रचारित और प्रसारित किया जा रहा है वो समाज के वर्षो से शोषित निम्नवर्ग समाज को आशा तो दीखाता है परन्तु डरा भी रहा है
सत्तारूढ़ दल का ध्यान जितना सपनें दिखाने मे है उतना ही ध्यान शंका निवारण मे भी होना चाहिये खास तौर पर शोषित समाज का जो नाराज होने लगा है
२रोटी कम खालेंगे खिला कर अपमानित करोगे ये बरदास्त नही करते, मांग लेगें चोरी नही करते,मेहनत करेगें उधार नही लेते/लिया है इसलिये देते हो.समझे।
सरकार है दिखना चाहिये और उसके लिये इतना दिखावा किया कि बहुत कुछ ऐसा भी दिखा दिया जो गरीबदेश की गरीब जनता को अपना मजाक उडाना लगा हो शायद.।
वीकास के नाम पर उच्च व्यवसायी वर्ग को हर प्रकार की वित्तीय सुविधाएं देना वहीं दुसरी तरफ गरीबों के अनुदान को भीख बता नीम्नवर्ग को नाराज किया
बडोदा मे स्वंय को सेवक और मजदुर न-१ घोषित किया वही पुरी विकास प्रकिया की नीति निर्धारण समिति से मजदुरों को बाहर रख मजदूर वर्ग को नाराज किया
सरकारीतंत्र की अफसरशाही द्वारा विगत६० वर्षोसे किये जारहे शोषन को ठिक करनेकी बजाय जनता की विरोधी आवाज को"अराजकता"कह जागरूकवर्ग को नाराजगी दी।
रामजन्मभुमी गोहत्या के मुद्दे पर घोर चुप्पी वहीं दुसरी तरफ छद्मसैक्यूलरवाद के जनक गांधी का महिमा मंडन कर हिन्दूराष्ट्रवादियों को नाराज किया
अभी भी अगर दिल्ली के चुनाव के नतिजे का विश्लेषण अपने मूल सिद्धांतों और समर्थकों की भावना के विपरित किया तो आगे रामजी ही मालिक  हैं।
मेरे हिन्दू भईयों बहनों है तो, उपरोक्त बातें कडवि और पूर्णरुप से सहमत भी ना हो..
परन्तु जमीनी हकिकत यही है, हम भारतीयों का धार्मिक पतन तीन ही अवस्थाऔ मे होता है या तो व्यक्ति अभिमान को ठेस पहुंचे(जयचंद) बहुत गरीबी में(माओवादी-धर्मांतरण) या बन्धवा गुलामी के भय में(किसान मजदूर)..और ये ही तीनों कारण रहे है हमेशा हिन्दू एकता के लिये सबसे बडे बाधक....
!!राम!!
राजेश कुमार तामडेत
०९-०२-२०१५
कलकत्ता

Sunday, 18 January 2015

#WeHindu #HinduRise अखंड भारत मेरा सपना !!राम!!

     कुत्ता एक समूह में,एक दुसरे की मदद करते हूवे जीने वाला एक सामाजिक प्राणी है परन्तु दुसरे गली के कुत्ते को देखते ही भोंकने भी लगता है,फिर एक कुत्ते को दुसरे समूह की कुतिया से प्रेम हो जाता है.वह समूह छोड दुसरे समूह का हिस्सा बन जाता है..ओर फिर अपने पुर्व के समूह पर ही भौंकने लगता है।
हम मध्यम,निम्न मध्यम वर्ग, गरीब मजदूर किसानों के समूह से हमारा एक भाई शोषण के खिलाफ क्रूर शासक समूह को हमारी ताकत बन चुनोती देता है, परन्तु जैसे ही नेता बन उस सत्ता समूह का हिस्सा बनता है, उनकी ही भाषा बोलने लगता है और उसे वह सब बातें उचित लगने लगती है जो हमारे बीच रहते गलत लगती थी और हम उसे मुर्ख लगने लगते हैं।
विकास,सुधार,भाईचारा और गंगाजमुनि संस्कृति के नाम पर गांधीनेहरू परिवार ने प्रशासन और धनी वर्ग में बैठे अपने कुसंस्कारी चमचों के साथ मिल हमें खुब लुटा।
हम राष्ट्रवादियों को इस छद्मवीकास और कुसंस्कृती का नाश कर रामराज्य अधारित समग्रवीकास करते हुवे अखंडभारत की नींव और गौसंस्कृती को पुन:स्थापित करते हुवे विश्वगुरू बनना है।
सडी गली व्यवस्थाओं को उन्ही के सहयोग से कभी नहीं सुधारा जा सकता जिन्होंने पाश्चात्य संस्कृति का अन्धा अनुकरण कर उसे सडाया हो।अपनी सनातनी संस्कृति की जडों(समुह) को पहचानें तभी विकास स्थायी होगा।सावधान!!_वरना हम भी नास्तिकता और छ्द्म मानवतावादी की आड में भौतिक और भोगवादी बन प्रकृति के समस्त जिव जन्तुऔ और सम्पदा के नाश करने का कारण बनेगें या हम में और उस पशु में कोई अन्तर नही रह जायेगा जिसने भोग और निज स्वार्थ के लिये अपने संकल्प और समूह को धोका दिया।
मातृभूमि,मातृशक्ती,वेद-वेदान्तों,साधु और स्वधर्म की रक्षा को ही जो अपनी शान समझे वही तो है सच्चा हिन्दू और भारत माता का सपूत है भोग,कामतृप्ति,भरण पोषण और अपने इलाके की रक्षा तो एक जंगली पशु और कुत्ते भी कर ही लेते है..!! नही ""??
।।वन्देमातरम।।
भाईयो बहनों
अब जैसे हैं,वैसे हैं और वैसे ही रहेगें..
अच्छा लगे तो अपना लो, बुरा लगा तो
प्रेम से बोल दो या गाली देकर संबध तोड लो :)
No body will be allowed to play anymore with Hindu Majority's Sentiments
#WeHindu will show them Way>>To Exile >No Matter Who/Where YouAre  >>>
#HinduRise
!!राम!!:))