Sunday, 28 August 2016

लोकतंञ या लघुतंञ °??

बहुत बडी कीमत चुका रहा है हमारा देश और बहुसंख्यक समाज काल से प्रभावित संविधान मे डाली उन कानुन की धाराओं की जब जरुरी था लघुसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करना तत्कालिन परिस्थितियों की वजह से शायद.. परंतु आज भी उसे खींचा जा रहा है आखिर क्यों"?
शायद उसी का ही यह परिणाम है कि मुस्लिम अल्पसंख्यक होते हुवे भी सरे आम सडकों पर उतर हिंदुओं की पुज्या गौमाता और धर्म के सबसे बडे जिवीत प्रतिक चिन्ह के मांस को खा चिढाने की हिम्मत जुटा पाते है, और उन्हें उनके मौलिक अधिकार के नाम पर सरकार द्वारा सुरक्षा भी प्रदान कर दी जाती है..
संभवत: उसी का परिणाम है कि मुलायम जैसे छद्म समाजवादी बेशर्मी से उद्घोष करते है कि हजारों हिंदु क्यों ना मारे जाये 1 मुस्लिम या उनके निर्जीव प्रतिक चिन्ह को नुकसान नही होना चाहिये..
शायद इसी का परिणाम है कि लघुसंख्यक भोगी, नास्तिक, लम्पट, संस्कारहिन भ्रष्ट 1विशेष वर्ग सरे आम देश की सबसे बडी आबादी को लगातार मानसीक रुप से प्रताडीत करता रहता है उनके धर्म के प्रत्येक प्रतिकों, सनातनी परंपराओं, संतो और उनके संस्कारों का नित्य अपमान कर के..।।

कैसे मान लुं कि मेरे देश मे लोकतंञ है जबकि यहां तो लघुतंञ है..चंद मुट्ठी भर लोगों की भावनाओं के समर्थन और सिर्फ उन्हिं के मौलिक अधिकारों को सुरक्षा प्रदान करने में मानो पुरी की पुरी व्यवस्था और सरकारी कयानात लगी है..और देश की आबादी का 80% होते हुवे भी बहुसंख्यक हिंदु समाज जाये..... या अपने इष्ट के शरण मे..पुकारते हुवे कि
कृष्ण तुम कब आओगे...।।
हे राम मने उठाले...।।

#भुल_चुक_माफ

#WakeUpHindus
#WakeUpNation

।।वंदेमातरम्।।🙏
।।राम।।🙏🙏

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@RajeshTamret

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