Thursday, 6 October 2016

बामपंथ या लम्पट भोगतंञ *??

बामपंथ या लम्पट भोगतंञ"??

मार्क्स और लेनीन आज जिंदा होते तो इन भारतिय कौम्युनिस्टों को देख अपना मूंह नोच लेते,स्वदेश केलिये सर्वस्व न्योछोवर करने और मरने की शिक्षा दी थी लेनीन ने कभी,
स्वदेश के दुश्मन जो अपने ही देश के सैनिकों के उपर कायरपुर्ण हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दे, उनके सुर मे सुर मिला,उन्ही की भाषा मे बयान दे स्वदेश के साथ गद्दारी करने को नहीं कहा था कभी...
मार्क्स ने धर्म को अफीम कहा था,.ऐक धर्म विशेष के मौलवी बन खुद को धर्म का ठेकेदार बनने को मार्क्सवाद का दर्शन कह प्रचारित करने को तो कतई नही कहा था कभी..
मार्क्सवाद, लेनीनवाद कभी सर्वहारा का मतवाद हुवा करता था..आज सीर्फ मुस्लिम तुष्टीकरण का जरिया ऐंव बुर्जूवा भोगी लम्पट समुदाय का ऐक देशविरोधी महाघातक ऐक महागठबंधन बन गया है जिसका मार्क्सवाद या लेनीनवाद के मान्य स्थापित दर्शन से कोई लेना देना नही है और नाही दुर दुर तक कोई संबध ही और ये जितने आजकल खुद को बामपंथी कह कर प्रचारित करते नजर आ रहे हैं सोसल मिडिया पर या टिवी स्टुडियो मे, या आप जिन्हें बामपंथी समझे बैठे हैं वो सभी या तो मुस्लिमपरस्त लोग है या खाओ,पीयो ऐश करो समुदाय के भोगी लम्पट लोग हैं.. जिनका सीर्फ और सीर्फ ऐक ही उद्देश्य है..
सिमरन जिले अपनी जिंदगी..
जिंदगी मिलेगी ना दोबारा..
कल किसने देखा है..
भोग और रूचि रस की तृप्ती के लिये
जो भी साधन मिले उसे लेलो,
कुछ भी खालो..
कुछ भी, कहीं भी घुसा लो.. ।।
ना इनका कोई देश है
ना कोई आदर्श ही..
मानवता और भाईचारा तो बस इनका 1बहाना है, मकसद इनका सीर्फ
मस्त हो 1जिंदगी बिताना है..

सावधान ऐसे लोगों से मेरे भारतवासियों..

ये ही हैं देश और मानवता के आज के सबसे बडे दुश्मन...

इनके लिये भारत, मातृभूमी नही..
भोग भूमी है माञ....

तुम नही, कोई और सही.. और नही..
कोई और सही..

चल देंगे अपना कालाधान बटोर किसी भी दुसरे मुल्क मे जिस दिन अवसर मिला इन्हें, वीजय मालया और ललीत मोदी की तरह.. पर
हमारे लिये भारत ऐक भौगौलिक जमीन का टुकडा नही है माञ,भाई मेरे,
हमारे पुर्वजों की धरोहर है...
माँ है ये हमारी..
इसे बचा लो मेरे भाईयों बहनों...
बचा लो इसे...छद्ममानवतावाद का नकाब ओढे इन झुठे मक्कारों से और इनका पर्दाफाश करो अविलम्ब..🙏

*देखो वीर जवानों अपने*
*खून पे ये इल्जाम ना आये*
*माँ ना कहे के,मेरे बेटे*
*वक्त पडा तो काम ना आये..*
*देखो वीर....*🙏�

भारत माता की जय..।। 🙏
वंदेमातरम् ।।🙏
।।राम।।🙏

Twitter ID @RajeshTamret

Sunday, 28 August 2016

लोकतंञ या लघुतंञ °??

बहुत बडी कीमत चुका रहा है हमारा देश और बहुसंख्यक समाज काल से प्रभावित संविधान मे डाली उन कानुन की धाराओं की जब जरुरी था लघुसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करना तत्कालिन परिस्थितियों की वजह से शायद.. परंतु आज भी उसे खींचा जा रहा है आखिर क्यों"?
शायद उसी का ही यह परिणाम है कि मुस्लिम अल्पसंख्यक होते हुवे भी सरे आम सडकों पर उतर हिंदुओं की पुज्या गौमाता और धर्म के सबसे बडे जिवीत प्रतिक चिन्ह के मांस को खा चिढाने की हिम्मत जुटा पाते है, और उन्हें उनके मौलिक अधिकार के नाम पर सरकार द्वारा सुरक्षा भी प्रदान कर दी जाती है..
संभवत: उसी का परिणाम है कि मुलायम जैसे छद्म समाजवादी बेशर्मी से उद्घोष करते है कि हजारों हिंदु क्यों ना मारे जाये 1 मुस्लिम या उनके निर्जीव प्रतिक चिन्ह को नुकसान नही होना चाहिये..
शायद इसी का परिणाम है कि लघुसंख्यक भोगी, नास्तिक, लम्पट, संस्कारहिन भ्रष्ट 1विशेष वर्ग सरे आम देश की सबसे बडी आबादी को लगातार मानसीक रुप से प्रताडीत करता रहता है उनके धर्म के प्रत्येक प्रतिकों, सनातनी परंपराओं, संतो और उनके संस्कारों का नित्य अपमान कर के..।।

कैसे मान लुं कि मेरे देश मे लोकतंञ है जबकि यहां तो लघुतंञ है..चंद मुट्ठी भर लोगों की भावनाओं के समर्थन और सिर्फ उन्हिं के मौलिक अधिकारों को सुरक्षा प्रदान करने में मानो पुरी की पुरी व्यवस्था और सरकारी कयानात लगी है..और देश की आबादी का 80% होते हुवे भी बहुसंख्यक हिंदु समाज जाये..... या अपने इष्ट के शरण मे..पुकारते हुवे कि
कृष्ण तुम कब आओगे...।।
हे राम मने उठाले...।।

#भुल_चुक_माफ

#WakeUpHindus
#WakeUpNation

।।वंदेमातरम्।।🙏
।।राम।।🙏🙏

Twitter ID
@RajeshTamret

Sunday, 14 August 2016

अखंड भारत.. ऐक सपना..ःः।

जब हम कहते हैं अखंड भारत तो इसका अर्थ यह कतई नही है कि वो जो चंद वर्षों पहले कुछ राजनैतिक लोगों ने एक कमरे में बैठ कर अपनी महत्वाकाक्षांपुर्ती करने या विदेशियों के दबाव मे आकर या काल और परिस्थिती के वश कुछ आडी तीरछी रेखाऐं खिंच दी अपने मतवाद को स्थापित कर इतिहास पुरुष बनने के लिये, नाकी इस महान भूमी की महान सनातनी परंपराओं को स्थापित करने,या यहां के बहुसंख्यक भावों को मान देने के लिये..
वरना आज भी गाय की सुरक्षा पर चर्चा की जरुरत क्यों हो रही है.."?
क्यों आज भी गंगा को सफाई करने की बात हो रही है.."?
क्यों गीता को राष्ट्रिय ग्रंथ ना मान एक धर्म का ग्रंथ माना जा रहा हैं"?
क्यों आज भी जन्मभूमी को मातृभूमी मानने वाले देश के संस्कारों मे वन्देमातरम् पर प्रश्न उठाये जा रहे हैं"?
अगर सभी उपरोक्त बातें किसी धर्मविशेष से संबधित है तो..
ऐक विशेष दुसरे धर्म की हरकतों पर मौन क्यों "?
जो राष्ट्रध्वज के गायन पर धर्म के आधार पर आपत्ती करता है"?
 जन्मभूमी को जमीन का एक टुकडा और गाय माता को खाद्य समाग्री मानता है"?
 अपने देश से ज्यादा गैर देश से प्रेम करता या मानवता का आवरण चढा प्रेम बढाने की बात करने की सलाह देता है "? *मानवता तो बस बहाना है मकसद तो इनका अपने धर्म वालों से मेल बढाना है..*
*हमने राष्ट्रप्रथम के नाम पर अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों तक कि तिलांजली दे दी और उन्होनें अपने धर्म के लिये राष्ट्रप्रथम को कब्र..*
 इसलिये बदल डालो इन मुगलों और अंगरेजो का इतिहास.. और जागृत करो भाव अपनी दिव्य सनातनी परंपराओं का आर्यपुञों,
 हमारा अंखड भारत वह है जिसके
पश्चिम मे बुद्ध और माँ हिगलाज विराजमान है
पुर्व मे उन सुदूर पहाडियों पर अ़कित भगवान नारायण की मुर्तियां आज भी अंकित है..
उत्तर मे ओम कैलाश पर्वत पर महादेव मान सरोवर की शोभा बढा रहे है..और
दक्षिण मे अशोक वाटिका मे आज भी माँ जानकी की छवी विराजमान है..
हमारी दिव्य सनातनी धरोहर को जानो.. हम विक्रामादित्य के भारतिय है..
ना कि मुट्ठी भर इतिहासकारों और नेताओ के पाले हुवे पोपट कि जो वो पढाये या रटाये उसे रटते रहें..
*जागो पार्थ,पहचानो अपने आप को,
छिन लो जो खोया है तुमने..
कौरव तब भी थे, कौरव आज भी है.. इंद्रप्रस्थ उनका भी छिन लिया गया था और तुम्हारा भी..
तब भी सत्ताधर्म मे बंधे भिष्म और गुरू द्रोण अंधे ध्रितराष्ट्र का साथ दे रहे थे और आज भी अंधे कानून से बधें ये राजनेता सनातन धर्म से विमूख हुवे है..ना पड मोह मे तू क्या खोयेगा.. सोच कि तू क्या पायेगा..
अंखड भारत, दिव्य भारत.. सनातनी परंपराओं से ओतप्रोत अंखड भारत..।।

#AkhandBharat वतर्मान युवा पीढ़ी खंडित भारत को पुनः अखंडभारत बनाने हेतु संकल्पबद्ध हो:

जय माँ भारती
।।वन्देमातरम्।।
।।हर हर हर महादेव।।
।। जय भवानी ।।
।।राम।।
🙏🙏🙏