भारत मे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं मे चुनाव होते हैं और हर पांच साल में वोट होते है, और उसमें लगभग 60% जनता ही वोट देती है, और वो भी माञ नेताओं के भाषणों में उनके द्वारा किये हुए वादों या किसी एक विशेष भावनात्मक ईशू पर नेता की एक काल्पनिक छवी बना,
यह एक सर्वविदित क्रूर सत्य रहा है भारत के लोकतंञ का, और
मतदाताओं को कभी भी इन सरकारी जटिल आंकडो और उनके राजनैतिक दुरगामी प्रभाव जैसे नोटबंदी, GST वाले निर्णयों से कही अधिक रुची इस बात पर होती है कि हमे क्या मिला ? क्या जिसका वादा हमे नेता या पार्टी ने अपने भाषण मे किया था चुनावों के पहले, वो पुरा हुआ की नही..।
तो उसी संदर्भ मे मैं आपको स्मरण कराना चाहता हु वो भाषण जो आज भी मतदाताओं को याद है..जो मोदीजी ने कभी सभाओं में तो कभी टीवी इंटरव्यू के द्वारा तो कभी सोसलमिडिया द्वारा मतदाताओं तक पहुचाये थे 👇
1" आपने कांग्रेस को 60 वर्ष दिये, मुझे 5 वर्ष दिजिये.....।"
2" Pink Industries को बंद किया जायेगा.."
3"बंगलादेश से हो रही घुसपैठ पर पुर्णततया रोक लगा बंगलादेशियों को वापस भेजा जायेगा.."
4, एक वर्ष में तमाम संसद के राजनेताओँ के भ्रष्टाचार के मामलों को उच्चतम न्यायालय के माध्यम से निपटाया जायेगा..।
(5, कांग्रेशियों ने लोगों को सब्सिडी दे निकम्मा बना दिया है हम इतनी ताकत देंगे की वो खुद चार के पेट भरेगें इतने रोजगार के साधन उप्लब्ध करायेगें)
(6, विदेशों में जमा कालाधन वापस लाएंगे और भ्रष्टाचारी उद्दोगपति और राजनेताओं ने जो घरेलू कालाधन जमा किया है वो बाहर करेगें जो इतना है की एक एक के खाते में 15 लाख हो जायें)
(7, अयोध्या की जनसभा में भव्यराममंदिर और प्रभूराम की तस्वीरों के सामने खडे होकर भाषण दे अपनी अपरोक्ष प्रतिबद्धता का संकेत)
और आज जिस तरह जमीनी हकीकत, सिस्टम का दोष और 70 साल के बने गड्ढों के आंकडे पेश कर,क्या आप चुनाव के पहले के आपके स्वंय के आकलन और उन वायदों को पुरा करने के लिये अतिरिक्त समय मांग कर,क्या आप खुद ही आप खुद के पुर्व के आकलनों को गलत शाबित करते प्रतीत नही हो रहे हैं सरेआम"?
या मतदाताओं को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि, पता तो था, परन्तु हम वोट मे जीतने के लिये माञ चुनावी भाषण दे रहे थे तब "???
और सबसे बडी बात आज भारत के 60% हिन्दु मतदाता को ना इन पाश्चात्य प्रभावित सोसलमिडिया के बुद्धिजिवियो द्वारा प्रसारित Right-wing, Left-wing की अवधारणाओं से मतलब है ना इ्स क्षद्म सैक्युलरिज्म से ही,
वो तो माञ चुनाव मे नेताओं द्वारा दिये भाषणों और वादों पर उन्हें वोट देती है.. और
जब वह आपके साथ जुडते है तो ये समस्त राजनैतिक नेताओं और उनके पार्टि के कार्यकर्ताओं की जिम्मेवारी होती है कि उन्हें अपने पास बनाये रखने के लिये उनकी शंकाओ का समाधान देकर निवारण करे ताकि उनमे आपके प्रति विश्वास बना रहे..
परन्तु अफसोस इसके उलट जब जब कोई मतदाता किसी नेता और कार्यकर्ताओं से प्रश्न पुछते हैं तो उन्ही हिन्दुवादी वोटरों को कभी आपीया, कभी कांग्रेशी और ना जाने क्या क्या कह अपमानित करने की प्रथा चल निकली है आजकल...
सारे आदर्श धरे रह जाते हैं जब किसी व्यक्ति के आत्मसम्मान को चोट पहुचती है तो, या उसकी रोजीरोटी छीनी जाती है या उनके रोजगार के साधनों पर सीधा प्रहार होता है तब,..
पार्टि कार्यकर्ता का कार्य साथ मे आये समर्थक रुपी साथीयों को जोडे रखना होता है और विपक्ष द्वारा किये गये भ्रामक प्रचार से भ्रमित हुवे आमलोगों को सही मार्ग मे लाना होता है नाकी जो अपने हैं उन्हें ही नित्य अपमानित कर खुद से ही दुर कर देना..।
और जब तक हम हिन्दुओ को ऐक विशेष पार्टी का सदस्य होने पर ही सच्चा हिन्दू मनवाने की जिद्द बनी रहेगी इन पार्टियों की,ना ही यह निती कभी किसी पार्टि को सख्त कर पायेगी ना हिन्दुओ को ही..।।।।
There is popular saying in corporate world " If you can't convince them, Confuse them..""
I hope we are not doing that...By daily dose of rehotic by raising new issues which had nothing to do with past promise made ..
😀😀
ईतिहास गवाह है अक्सर वही धार्मिक आंदोलन सफल हुवे है जिनको राजसत्ता का समर्थन मिला है.. और हिन्दू समाज को कांग्रेसी शासन मे तो कभी मिलने की उम्मीद थी ही नही और अभी जो राजसत्ता है उसकी भी priorities हिन्दूओ के मुद्दे से कही अधीक खुद की छवी सैक्यूलरों को रिझाने और better than whorst दिखा बेहतर विकल्प दिखाने की अधिक दिख रही है..
ना वादे पुरे करने में ध्यान है ना ईरादे ही दिख रहे हैं फिलहाल तो,
बस दिख रहे हैं तो तमाशे..और क्षद्म महिमामंडन और व्यक्तापुजा माञ....
यह तो कांग्रेश की सत्ता वापसी की जल्दबाजी मे किये जा रहे रोज कुछ ना कुछ मुर्खतापुर्ण कदम हैं जिनका लाभ अपरोक्ष रुप से मिल रहा है भाजपा को वरना जो लिछादरी गुजरात में होते होते बची विकास के नाम पर वह 2019 मे भी होते देर नही लगेगी..
अभी भी सम्भल जाऐं.. मूल पर लौट आयें और जो वादे किये हैं उपरोक्त उन्हें पुरा करें यथाशिघ्र.. 🙏
छोडो ये विकास..सबका साथ सबका विकास का फितूर,
लौट आओ उसी बात पर जिसपर विश्वास कर वोट.दिया था हिंदुओं ने एकजूट हो 2014 में..
We want our Gujarat Model back .. that is not Vikas at all mind it , that was Godhra 🙏
#HarshButTrue
वंदेमातरम् ।।🙏
।।राम।।😊💐🙏