Sunday, 8 February 2015

"मन की बात"- After #DelhiElection Exit Poll..

हमारी मातृभूमि का स्वर्णिम वीकास सिर्फ प्रभु राम और कृष्ण की प्रेरणा से उनके धर्मपरायण त्याग और मर्यादापूर्ण जीवन को आदर्श माने तभी संभव है।
रामजी ने सुविधाऔ से वंचित वन और वानर समाज को ही साथ लेकर भोगी त्रीलोक वीजयी पढे लिखे रावण के सम्राज्य का नाश कर रामराज्य की स्थापना की थी।
वासूदेव कृष्ण ने धर्म की पुन:स्थापना साधनों से वंचित परन्तु धर्मपरायण पांडवों को ही माध्यम बना कर की थी नाकी तत्कालीन भोगी लोभी उच्च वर्ग को।
आज जो वीकास का मोडल प्रचारित और प्रसारित किया जा रहा है वो समाज के वर्षो से शोषित निम्नवर्ग समाज को आशा तो दीखाता है परन्तु डरा भी रहा है
सत्तारूढ़ दल का ध्यान जितना सपनें दिखाने मे है उतना ही ध्यान शंका निवारण मे भी होना चाहिये खास तौर पर शोषित समाज का जो नाराज होने लगा है
२रोटी कम खालेंगे खिला कर अपमानित करोगे ये बरदास्त नही करते, मांग लेगें चोरी नही करते,मेहनत करेगें उधार नही लेते/लिया है इसलिये देते हो.समझे।
सरकार है दिखना चाहिये और उसके लिये इतना दिखावा किया कि बहुत कुछ ऐसा भी दिखा दिया जो गरीबदेश की गरीब जनता को अपना मजाक उडाना लगा हो शायद.।
वीकास के नाम पर उच्च व्यवसायी वर्ग को हर प्रकार की वित्तीय सुविधाएं देना वहीं दुसरी तरफ गरीबों के अनुदान को भीख बता नीम्नवर्ग को नाराज किया
बडोदा मे स्वंय को सेवक और मजदुर न-१ घोषित किया वही पुरी विकास प्रकिया की नीति निर्धारण समिति से मजदुरों को बाहर रख मजदूर वर्ग को नाराज किया
सरकारीतंत्र की अफसरशाही द्वारा विगत६० वर्षोसे किये जारहे शोषन को ठिक करनेकी बजाय जनता की विरोधी आवाज को"अराजकता"कह जागरूकवर्ग को नाराजगी दी।
रामजन्मभुमी गोहत्या के मुद्दे पर घोर चुप्पी वहीं दुसरी तरफ छद्मसैक्यूलरवाद के जनक गांधी का महिमा मंडन कर हिन्दूराष्ट्रवादियों को नाराज किया
अभी भी अगर दिल्ली के चुनाव के नतिजे का विश्लेषण अपने मूल सिद्धांतों और समर्थकों की भावना के विपरित किया तो आगे रामजी ही मालिक  हैं।
मेरे हिन्दू भईयों बहनों है तो, उपरोक्त बातें कडवि और पूर्णरुप से सहमत भी ना हो..
परन्तु जमीनी हकिकत यही है, हम भारतीयों का धार्मिक पतन तीन ही अवस्थाऔ मे होता है या तो व्यक्ति अभिमान को ठेस पहुंचे(जयचंद) बहुत गरीबी में(माओवादी-धर्मांतरण) या बन्धवा गुलामी के भय में(किसान मजदूर)..और ये ही तीनों कारण रहे है हमेशा हिन्दू एकता के लिये सबसे बडे बाधक....
!!राम!!
राजेश कुमार तामडेत
०९-०२-२०१५
कलकत्ता

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